Sunday, June 23, 2019

वैदिक गणित - एकाधिकेन पूर्वेण - भाग -2





एकाधिकेन पूर्वेण


मित्रों, पिछले अंक में आपने एकाधिकेन पूर्वेण द्वारा भाग देने की प्रक्रिया को समझा. उम्मीद है आपने इस प्रक्रिया द्वारा कुछ और सवाल हल करने की कोशिश की होगी और सफलता पाई होगी. पिछले अंक को आगे बढ़ाते हुए इसी सूत्र के कुछ अन्य अनुप्रयोग देखते हैं.
उदाहरण :- 1/7 को दशमलव आवर्त में बदलें
हल :- यहाँ हर 7 है अतः हर 9 बनाने के लिए अंश और हर को 7 से गुणा करते हैं
 = 1 x 7  = 7
7    7 x 7    49
चूँकि हर 7 है अतः आवर्त 6 अंको तक रहेगा.9 के पूर्ववर्ती अंक 4 है अतः एकाधिक 4 + 1 = 5
पहला पद :- 7            
दूसरा पद:- 357 35 (7 × 5 = 35; 3 को शेष रखा और 5 को उत्तर में लिखा )
तीसरा पद :-  2857 (5 X 5 =25, +3 = 28)           चौथा पद:-  42857 (8 X 5 =40, +2 = 42)
पांचवा पद :- 142857 (2 X 5 =10, +4 = 14)         छठा पद:- 2142857 (4 X 5 =20, +1 = 21)
चूँकि आवर्त पीरियड 6 है ,
अतः 1/7 = 0.142857 -----
उपरोक्त उदाहरण सिर्फ आपको ये समझाने के लिए दिया गया है की अगर हर 9 ना हो तो किसी संख्या के साथ गुणा कर आप हर का ईकाई अंक 9 बना सकते हैं.मसलन यदि हर का ईकाई अंक 3 हो तो आप अंश और हर में 3 से गुणा कर सकते हैं. 7 हो तो 7 से गुणा कर सकते हैं
1 = 1 × 7   = 7`                                                            4  =  4 × 3    = 12
17   17 × 7    119                                           13    13 × 3       39
अन्य स्थिति के लिए सूत्र का प्रयोग थोडा बदल कर किया जा सकता है. जिसकी चर्चा किसी अंक में आपको देखने को मिलेगा.
इस सूत्र का दूसरा अनुप्रयोग वर्ग करने के लिए किया जाता हैं जब वर्ग की जाने वाली संख्या का ईकाई अंक 5 हो. वैदिक गणित का यह सूत्र कहता है की अगर ईकाई अंक 5 हो तो ईकाई को छोड़ शेष संख्या को उसके एकाधिक से गुणा करें और अंत में 5 का वर्ग 25 आगे लिख दें
उदाहरण:- (35)2 = ?
हल :- 3 का एकाधिक = 3 + 1 = 4
3 को उसके एकाधिक से गुणा करने पर = 3 x 4 = 12
5 का वर्ग = 25
(35)2 = 1225
उदाहरण:- (55)2 = ?
हल :- 5 का एकाधिक = 5 + 1 = 6
5 को उसके एकाधिक से गुणा करने पर = 5 x 6 = 30
5 का वर्ग = 25
(55)2 = 3025
उदाहरण:- (75)2 = ?
हल :- 7 का एकाधिक = 7 + 1 = 8
7 को उसके एकाधिक से गुणा करने पर = 7 x 8 = 56
5 का वर्ग = 25
(75)2 = 5625
उदाहरण:- (95)2 = ?
हल :- 9 का एकाधिक = 9 + 1 = 10
9 को उसके एकाधिक से गुणा करने पर = 9 x 10 = 90
5 का वर्ग = 25
(95)2 = 9025
उदाहरण:- (105)2 = ?
हल :- 10 का एकाधिक = 10 + 1 = 11
10 को उसके एकाधिक से गुणा करने पर = 10 x 11 = 110
5 का वर्ग = 25
(105)2 = 11025
आपने देखा की वैदिक गणित के सरल सूत्रों को सहायता से आप गणना को कैसे सरलता से हल कर सकते है तो इंतजार कीजिए अगले अंक का जहाँ आपसे किसी और सूत्र पर चर्चा करेंगे.
डॉ राजेश कुमार ठाकुर


Best Book on Vedic Mathematics

वैदिक गणित - एकाधिकेन पूर्वेण - भाग - 1


वैदिक गणित

मित्रों, वैदिक गणित 16 सूत्रों और 16 उपसुत्रों पर आधारित एक ऐसी प्रणाली है जिसमे अंकगणित, बीजगणित, नियामक ज्यामिति , कैलकुलस जैसे गणित के जटिलतम शाखाओं के जटिलतम सवालों को पलक झपकते करने का रहस्य छिपा हुआ है. इसके सूत्रों के खोज और इसके वेदों से सम्बन्ध पर चर्चा करना निरर्थक है परन्तु जगद्गुरु स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ जी द्वारा लिखी पांडुलिपि को 1965 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाया गया जिसे वैदिक गणित के रूप में ख्याति मिली. हमें भारत के गणित और इसकी प्राचीन परम्परा के बारे में पता तो है पर एक कहावत है – घर का जोगी जोगडा, आन गाव का सिद्ध . हमारी हालत भी कुछ ऐसी ही है. पुरे विश्व को गणित में शून्य, दाशमिक प्रणाली, द्विघात समीकरण का हल, अपरिमेय संख्याओं का मान, पाइथागोरस प्रमेय से पूर्व शुल्व सूत्र में भारत ने कर्ण, आधार और लम्ब का सम्बन्ध स्थापित किया. मेरु प्रस्तार जिसे पास्कल त्रिभुज कहते है इत्यादि खोज करने के बावजूद हम विदेशी नियमों और सिद्धांतो के गुलाम बने हुए है. आइये भारतीय गणित की इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए कुछ तरीकों पर चर्चा करना आरम्भ करते हैं . आशा है ये श्रृंखला आपको गणित के और करीब लाने में मदद करेगी और हमारा साझा प्रयास भारत को गणित के क्षेत्र में आगे ले जाने में सहायक होगा.

सूत्र :- एकाधिकेन पूर्वेण
एकाधिकेन पूर्वेण का अर्थ है पहले से एक अधिक. इसका अर्थ ये है की 1 का एकाधिक 1 + 1 = 2 होगा , 3 का एकाधिक 3 + 1 = 4 होगा. इस सूत्र का प्रयोग वर्ग निकालने में या आवर्ती दशमलव के भाग देने में काफी सहायक होता है. इस अंक में हम एक भाग द्वारा इस सूत्र को समझने का प्रयास करेंगे.
उदाहरण:- 1/19 को हल करें
हल :- यदि किसी भिन्न का हर 19, 29, 39, ---- हो तथा अंश 1 हो ( ये जरुरी नहीं है) को जब आप भाग देंगे तो आपका उत्तर एक आवर्ती दशमलव में आएगा. यहाँ हर 19 है अतः आवर्ती दशमलव 19 – 1 = 18 अंक तक रहेगा.
19 में 9 से पूर्व 1 है और 1 का एकाधिक 1 + 1 = 2 होगा. आइये इसी एकाधिक का प्रयोग कर बिना मुश्किल भाग दिए इस प्रश्न को हल करें. यहाँ हमारा गुणक अंक 2 है. सबसे पहले अंश में 1 लिखें और गुणक से गुणा करते रहें
पहला पद : - 1            दूसरा पद : 21( 1 को गुणक 2 से गुणा कर उत्तर पीछे लिखें)
तीसरा पद : - 421 ( 2 × 2 = 4)          चौथा पद :- 8421 ( 4 × 2 = 8)   
पांचवा पद :- 168421 ( 8 × 2 = 16; 6 को लिखा गया है और शेष 1 को नीचे लिखा है )
छठा पद:- 1368421 (6 X 2 =12, +1 = 13 का 3 लिखा गया है और शेष 1 को नीचे लिखा है)
सातवां पद:- 7368421 (3 X 2, = 6 +1 = 7)          आठवां पद:- 147368421 (7 X 2 =14)
नौवा पद : 947368421 (4 X 2, = 8, +1 = 9)        दश्वा पद :- 18947368421(9 X 2 =18)
ग्यारहवां पद :- 178947368421(8 X 2 =16,+1=17)   
बारहवाँ पद:- 1578947368421(7 X 2 =14,+1=15)
तेरहवां पद :- 11578947368421(5 X 2 =10,+1=11)
चौदहवां पद:- 31578947368421(1 X 2 =2,+1=3)
पन्द्रहवां पद :-  631578947368421(3 X 2 =6)
सोलहवां पद:- 12631578947368421(6 X 2 =12)
सत्रहवां पद:- 52631578947368421(2 X 2 =4,+1=5)
अठारहवां पद:- 1052631578947368421(5 X 2 =10)
अठारहवां पद के बाद अंकों की पुनरावृति शुरू हो जाएगी अतः पुरे उत्तर को आप एक लाइन में लिखने का प्रयास करें
1 / 19 = 0.052631578947368421
यहाँ आपकी सुविधा के लिए पुरे प्रक्रिया को पुरे चरणों में दिखाया गया था जिसे अभ्यास के साथ साथ  आप एक लाइन में करते हुए वैदिक गणित के सूत्रों के रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं. इसी कड़ी में आप 1/29, 1/39 को हल करने का प्रयास करें. अगले अंक में नये उदाहरणों और सूत्रों पर चर्चा करेंगे.
-डॉ राजेश कुमार ठाकुर




Sunday, June 9, 2019

कक्षा 10 के लिए वस्तुनिष्ठ प्रश्न - वास्तविक संख्या -

मित्रों
सीबीएसई अगले वर्ष से गणित में 20 अंकों का वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछने जा रही है

इसी श्रृंखला में मेरे ब्लॉग पर प्रत्येक अध्याय के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को अंग्रेजी में पढने का अवसर आपको मिलेगा जिसे आप दिए गए लिंक पर पढ़ सकते हैं

https://mathspearl.blogspot.com/


इस लिंक पर आपको वास्तविक संख्या पर 4 ब्लॉग मिलेंगे जिसमे कुल मिलकर ४० प्रश्नों को सम्मिलित किया गया है .


डॉ राजेश कुमार ठाकुर 

Friday, May 17, 2019

अंको की सुनामी - बोर्ड की मेहरवानी



अंको की सुनामी – मुफ्त की रबड़ी

विगत सात दिनों में सीबीएसई ने कक्षा 12 और 10 के रिजल्ट निकालें. यूँ तो रिजल्ट हर बार आता है पर चौकाने वाली बात ये है की कक्षा 12 वीं की टॉपर को 500 में 499 अंक हासिल हुए. कक्षा 10 का हाल भी यही रहा जिसमे 13 बच्चों ने 499 अंक लाकर इतिहास रच दिया. अब ICSE बोर्ड की कहानी भी सुने जहाँ कक्षा 12 के एक बच्चे ने 500 में से 500 अंक लाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है. अब सवाल ये है की बोर्ड के अंक देने की प्रणाली क्या वास्तव में इतना सक्षम है कि छात्रों के भाषायी ज्ञान, वाक्य विन्यास और उसके लिखने के प्रभावी अंदाज से मंत्रमुग्ध होकर ऐसे अंक देने में संकोच नही करती जहाँ तक पहुचना शायद संभव ही न हो. दूसरा पहलू ये है की परीक्षा के प्रश्नों का स्तर क्या इतना निम्न है कि हिंदी , अंग्रेजी जैसी भाषा में 100 में से 100 अंक देने में किसी को कोई गुरेज नही है. तीसरा पहलू ये भी हो सकता हो कि छात्रों के पास कोई जादुई चिराग हाथ लग गयी हो और जिसकी मदद से वे ऐसा अंक लाने में सक्षम हों.  
मैंने अपने कई मित्रों , शिक्षाविदों से इस बारे में बात की और कुछ को मेरा प्रश्न उचित और कुछेक को अनुचित लगा. कुछेक का मत ये था की आजकल छात्रों के पास पुस्तक के अलावा हर वो साधन मौजूद है जो उनके इस प्रकार के अंक लाने में उनकी मदद कर पाता है. अच्छे ट्यूशन , अच्छी पुस्तकों और पढाई के आधुनिक तकनीक से ऐसा संभव है. ये कुछ हद तक सही भी है पर इसका मतलब ये कतई नही है की आप 500 में 500 अंक लाकर पुरोधा बन जाएँ.
चिंता की बात ये नही है की किसके कितने अंक आये पर अब छात्रों के ज्ञान को पैमाना मानने की जगह हम छात्रों के अंक को उसके अच्छे और बुरे होने का मापदंड समझने लगे है. यदि किसी छात्र के 95 अंक हों तो घर में ऐसा मातम फैला होता है कि 100 से कम कुछ मंजूर ही नहीं है. छात्रों के 100 अंको की संख्या विद्यालय और उसमे पढ़ा रहे शिक्षकों की गुणवत्ता बताता है. माँ- बाप भी दिन रात लगे रहते है की उनके पुत्र के 99 अगर 100 नही तो आने ही चाहिए और इस गला काट प्रतिस्पर्धा में ज्ञान तो पीछे छुट गया. अंक सब चाहते है ज्ञान की किसे पड़ी है. 10 वर्षों के प्रश्नपत्र उठा कर देखिये क्या किसी बोर्ड ने कोई ऐसा प्रश्न पूछने का परीक्षा में साहस किया है जो छात्रों के ज्ञान की कसौटी को परख सके. शायद नही. यदि पुस्तक में राम ने कुछ सामान ख़रीदा है लिखा है तो रहीम लिखा  प्रश्न परीक्षा में नही पूछा जा रहा है. प्रत्येक अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों का लिस्ट कोचिंग वाले पकड़ा देते है और पुरे वर्ष उन्हें रटवाने में लगे रहते हैं. मतलब साफ है बोर्ड रट्टू तोता पैदा कर अपना पीठ थपथपाने को एक कार्य समझती है और माँ- बाप भी इसी रेस में है कि उनके बेटे को 98 या 99 से कम अंक ना आ जाये.
ज्ञान की कसौटी में अगर इन छात्रों को परखे तो कई 99 वाले आपको 70 वाले भी नहीं दिखेंगे तो इन तमाशों के पीछे मुख्य भूमिका किसकी है?
मैं इसके लिए किसी एक को दोष नही दे सकता. भारतीय शिक्षा प्रणाली ही पूरी तरह से ऐसी बना दी गयी है कि लोगों के सोच को उभारने का कोई मौका ही नहीं मिल रहा. शिक्षा में जो नित नए प्रयोग हो रहे है उसका अर्थ सिर्फ छात्रों के अंको का स्तर बढ़ाने के लिए है चाहे इसके लिए सिलेबस से कई महत्वपूर्ण अध्यायों को हटाना ही क्यों ना पड़े. प्रश्नों का स्तर ऐसा रखना है कि अगर कोई छात्र रटने में  तेज हो तो वो रट ले और अंक ले आये.
सरकार भी शायद इसमें सुधार नही चाहती क्योंकि सबको अपनी जो पड़ी है. किस शासनकाल में छात्रों के स्तर कितना रहा ये सरकार के लिए सोचनीय प्रश्न है. हाल ही में दिल्ली के कक्षा 9 में गणित विषय में 2 प्रश्न गलत छप गए जिसे परीक्षा के दौरान सुधार दिया गया पर रिजल्ट के 2 दिन पहले प्रत्येक छात्रों को 7 अंक दे दिए गए की प्रश्नपत्र में पूछे गए प्रश्न की बजह से छात्रों का नुकसान ना हो जाये. यही हाल इस बार कक्षा 12 में लीनियर प्रोग्रामिंग से सम्बंधित प्रश्न को लेकर रहा जहाँ प्रश्न थोडा छात्रों को सोचने के लिए मजबूर कर रहा था और छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के विरोध के चलते 6 अंक की मुफ्त की राबड़ी सब ने खा ली. यदि प्रश्न थोड़े से लिक से हटकर हो जाये तो हंगामा इस कदर होता है कि संसद में भी प्रश्न उठ खड़े होते है की बोर्ड छात्रों के साथ धोखा कर रही है और फिर छात्रो को मुफ्त के अंक.
परीक्षक भी आजकल ऐसे है की वो भरपूर अंक देकर खुद की पीठ थपथपाने में अपनी जीत समझते है कारण साफ है कम अंक देने पर उनसे सवाल जबाब पूछा जायेगा. आलम ये है की अगर किसी शिक्षक के द्वारा पढाये जा रहे  कक्षा का रिजल्ट पिछले वर्ष की तुलना में कम हो तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है. तो खेल ये है की स्कुलो के मैनेजमेंट को अपने स्कुल के प्रचार के लिए अंक चाहिए, माँ- बाप को समाजिक प्रतिष्ठा के लिए अंक चाहिए, नेताओं को अपने पिछले नेताओं से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अंक चाहिए पर ज्ञान जो छात्रों के भविष्य के लिए उपयोगी है किसी को नहीं चाहिए.
यदि हिंदी में 100, अंग्रेजी में 100 अंक मिल रहे है तो क्या जांचने वाले शिक्षक या अंक प्राप्त छात्रों का स्तर शेक्सपियर या तुलसीदास जैसा है. क्या हजारों की संख्या में विज्ञान और गणित में 100 अंक लाने वाले छात्रों के वावजूद हम एक रमण, या रामानुजन तक क्यों नही पैदा कर पा रहें है?
सरकार , समाज , शिक्षक , अभिभावक सब को संघटित होकर इस बंदरबांट के खिलाप आवाज उठानी चाहिए जिससे ज्ञान का प्रकाश फैलाया जा सके नहीं तो हम सिर्फ ये गाते रहेंगे की – जब जीरो दिया मेरे भारत ने दुनिया को तब गिनती आई
और अगर सच में बोर्ड स्वायत्त संस्था है तो परीक्षा का अर्थ दुबारा खुद समझे और फिर परीक्षा लेने जैसा नेक कार्य करें अन्यथा अंको के इस सुनामी में छात्रों का भविष्य लील जायेगा
डॉ राजेश कुमार ठाकुर


Wednesday, April 10, 2019